हर घूसखोर सवर्ण तो नहीं। हर बाबा ब्राह्मण तो नही। जिस बुद्ध ने मूर्तिपूजा और ईश्वरीय पाखंड का विरोध किया उन्हीं की आज मूर्ति बनाकर पूजा हो रही है। जब मनुवाद का विरोध करने वाले नोटों की माला पहनने लगे। और जहां समाजवाद जैक्लीन और करीना के ठुमको पर जन्मदिन मनाता है। पिछड़े ७५० करोड़ का मॉल बनाने लगे। रिक्शा खींचते लोग अगड़े बने हैं। ३५ साल कलकत्ता में राज करके साम्यवाद सोनागाछी में एशिया का सबसे बड़ा चकलाघर दे जाता है। वहां कोई कन्हैया आज़ादी-आज़ादी नहीं चिल्लाता है। कश्मीर में कोई और भारतीय नहीं बस सकते पर रोहिंग्यायो को दामाद बनाया जा सकता है। गोरखपुर में इसी साल तो बच्चे मरे हैं ? गरीबी १९७० में ही इंदिरा जी खतम कर गयी थीं। गैस चाहिए २००२ के रेट से पर तनख्वाह २०१६ के सातवें वेतन आयोग से चाहिए। टमाटर सस्ता मिले तो सरकार किसानो की कातिल, महँगी हो जाए तो संवेदनहीन। राष्ट्र से पहले मजहब..!!! अभिव्यक्ति वन्देमातरम हराम। भारत माता की जय हराम और मजहबी पढ़ाई की इमारतों के पीछे मोबाइल में पोर्न मूवी देखते लौंडे बन रहे मजहब के सिपेसालार...!! बुरहान जिंदाबाद संघी...